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मैंने अपनी पत्नी को गैर मर्द के साथ देखा, जिसके लिए मैं अपने आप को दोषी मानता हूं

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MERI KAHANI

मैं एक शादीशुदा आदमी हूं। मैं पिछले काफी समय से भारतीय सेना में कार्यरत हूं। मैंने अपना पूरा जीवन अपने देश की सुरक्षा के लिए समर्पित कर दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब मैं 6 साल का था, तो मेरे पिता ने मुझे सक्रिय और मजबूत बनने के लिए ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी थी। वह चाहते थे कि मैं भी उनकी तरह भारत माता की सेवा करूं। दरअसल, मेरे पिता एक सेना अधिकारी रह चुके हैं। उन्हीं की वजह से मुझमें प्रतिबद्धता-साहस और निरंतरता जैसे मजबूत मूल्य पैदा हुए हैं। यही एक वजह भी है कि परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मैं सीधा भारतीय सेना में शामिल हो गया।

मैंने अपने पूरे जीवन में एक सख्त अनुशासित दिनचर्या का पालन किया है। हालांकि, एक समय पर यह मेरे लिए बहुत घुटन भरा हो गया था। लेकिन मेरे पास अपने पिता के नक्शेकदम पर चलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था। हां, इस दौरान एक चीज जिसने हमेशा मुझे अपने करीब रखा, वह थी मेरी बचपन की दोस्त नैना। 

मां-बाप हमारी शादी के लिए राजी हो गए

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मैं नैना से पहली बार तब मिला था, जब हम दोनों हाई स्कूल में पढ़ते थे। वह एक बहुत ही प्यारी-चुलबुली और सुंदर लड़की है। जब मैं हर तरफ से अकेला महसूस कर रहा था, अपने जीवन में सब कुछ हार गया था, तब उसने मुझे थामने की हर संभव कोशिश की थी। उसने मुझे वह आदमी बनने में मदद की जो मैं आज हूं। हालांकि, हम दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि मैं बहुत ज्यादा अपने में रहने वाला व्यक्ति हूं या यूं कहें कि अंतर्मुखी किस्म का हूं जबकि नैना को लोगों से मिलना-जुलना बहुत अच्छा लगता है। उसकी इसी आदत से मुझे प्यार है कि वह पल बार में ही हर किसी को अपना बना लेती है। ऐसे में जब मैंने माता-पिता को हमारे रिश्ते के बारे में बताया, तो वह खुशी-खुशी हमारी शादी के राजी हो गए और बहुत जल्द हमने शादी कर ली। 

मैं उसे बहुत प्यार करता था

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हमारे वैवाहिक जीवन शुरू होने के दो हफ्ते बाद मुझे असम के सिलचर शहर में तैनात कर दिया गया था। हालांकि, मैं अपनी शादी का लुफ्त उठाना चाहता था। मैं नैना के साथ समय बिताना चाहता था। मैं अपनी खुशी का आनंद भी लेना चाहता था, लेकिन अपने कर्तव्य के कारण मुझे इन सब चीजों को छोड़ना पड़ा। शायद ऐसा इसलिए भी क्योंकि मैं अपने पिता को निराश नहीं करना चाहता था। मैं अगले ही दिन ही अपना सामान पैक करके असम के लिए निकल गया।

सिलचर में मुझे तैनात हुए दिन-सप्ताह और कई महीने बीत गए। नैना मुझे मिलने के लिए बुलाती रही। लेकिन मुझे उससे मिलने का एक भी मौका नहीं मिल सका। मैंने फोन करने की बजाए पुराने समय की तरह उसको पत्र लिखना शुरू कर दिया। हालांकि, हम वीडियो कॉल पर बात करते थे, लेकिन इसके बाद भी मैंने उसे लेटर लिखना जारी रखा। हां, वो बात अलग है कि मेरे भेजे गए पत्रों पर उसका कभी जवाब नहीं आता था। लेकिन इसके बाद भी मैं उससे बहुत प्यार करता था। 

मुझे नैना से आखिरी बार मिले डेढ़ साल हो चुका था

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नैना से आखिरी बार मिले हुए मुझे लगभग डेढ़ साल हो चुका था। उससे दूर रहने का दर्द हर पल मुझे बहुत सताता था। मैं उसके पास वापस जाने के लिए तरस रहा था। लेकिन अफसोस मुझे अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार होना पड़ा। हालांकि, डेढ़ साल और 2 महीने के बाद मुझे 2 सप्ताह के लिए घर वापस जाने का मौका मिला। मैं बहुत ज्यादा खुश था। चेहरे पर मुस्कान लिए नैना मेरा इंतजार कर रही थी। उसे देखकर मुझे बहुत ज्यादा राहत महसूस हुई।

उसके साथ पहले दो-चार दिन पूरी तरह से आनंदमय थे। लेकिन एक-दो दिन बाद मैंने देखा कि वह बहुत ज्यादा परेशान है। वह मुझे थोड़ी अलग लग रही थी। हालांकि, मैं उसकी परेशानी समझ नहीं पा रहा था, लेकिन यह भी सच है कि मैं दुख के पलों के बारे में सोचकर अपना खुशी का समय गंवाना नहीं चाहता था। इसलिए उसे खुश करने के लिए मैं जो कुछ भी कर सकता था, मैंने सब कुछ किया। 

मैंने उसे नहीं बताया कि मैं आ रहा हूं

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नैना से मिलने के बाद मैं 8 महीने के लिए पोस्टिंग पर फिर से लौट आया। सरहदों पर दर्द के साथ मेरा समय बीतता गया। हालांकि, सेना का अधिकारी होने के नाते देश मेरा पहला कर्तव्य था लेकिन नैना के पास लौटने का विचार ही मेरी एकमात्र प्रेरणा थी। काम की वजह से नैना के साथ मेरे पत्र कम होते गए। हम अब वीडियो कॉल पर भी ज्यादा बात नहीं करते थे। इसलिए, जब मैं दूसरी बार घर वापस गया, तो मैंने उससे बात करने की ठानी।

हालांकि, इस बार मैंने उसे सरप्राइज देने की योजना बनाई। मैंने उसे नहीं बताया था कि मैं घर आ रहा हूं। उसके चेहरे पर खुशी की कल्पना करके मैं बहुत ज्यादा खुश था। 

मैंने उसे दूसरे आदमी के साथ देखा

मैं अपना सारा काम खत्म करके घर के लिए निकल पड़ा। जैसे ही मैं अपने अलीगढ़ वाले घर पहुंचा, तो मैंने देखा कि चारों तरफ कपड़े पड़े हुए हैं। घर का सारा सामान अस्त-व्यस्त सा लग रहा था। मैंने अपना बैग एक कोने में रखा और हाथ में फूलों का गुलदस्ता लेते हुए बेडरूम की तरफ आगे बढ़ा। बेडरूम का दरवाजा खोलते हुए मैंने देखा कि नैना एक दूसरे आदमी के साथ है। वह दोनों एक साथ सो रहे थे।

उन्हें देखते ही गुलदस्ता मेरे हाथ से फर्श पर गिर गया। मैंने शोर मचाया और उन दोनों को डरा दिया। नैना मुझे देखकर एकदम चौंक गई। मैं वापस मुख्य द्वार की तरफ आगे बढ़ा लेकिन नैना ने चिल्लाते हुए कहा 'आई एम सॉरी।'

उसके विश्वासघात ने मुझे इतनी बुरी तरह से आहत किया था कि मैंने उससे बात करने से पूरी तरह इनकार कर दिया था। मैंने एक होटल में कमरा लिया। इसके बाद उसकी अंतहीन कॉलों ने मुझे परेशान कर दिया। लेकिन मैं बुरी तरह रो रहा था। मेरी पत्नी जिसे मैं पूरे दिल से प्यार करता था, वह मुझे धोखा दे रही थी।

मैं अपने आप को कभी माफ नहीं कर सकता

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काफी सारे फोन आने के बाद मैंने उसका कॉल लिया। उसने रोते हुए कहा कि मेरे जाने के बाद वह पूरी तरह अकेले हो गई थी। उसके अकेलेपन ने उसे मुझे धोखा देने के लिए प्रेरित किया। वह मेरे आगे माफी की भीख मांग रही थी। उसकी बातों को सुनकर मैं भी उससे कुछ नहीं कह सका था। ऐसा इसलिए क्योंकि मुझे लगता है कि अगर मैं सेना में नहीं होता, तो मैं एक सामान्य जीवन जी रहा होता। मैं हर दिन उसके साथ रह सकता था।

अगर मैं वहां होता तो उसने मुझे कभी धोखा नहीं दिया होता। इस घटना के बाद एक सेना अधिकारी के रूप में अपने देश के लिए लड़ने का मेरा संकल्प कम होने लगा। मैं अपनी नौकरी बदलना चाहता था, लेकिन मेरे पिता को निराश करने की सोच ने मुझे ऐसा करने से रोक दिया। मुझे नहीं पता कि मेरा जीवन मुझे किस रास्ते पर ले जाएगा। लेकिन आज मैं जिस स्थिति में हूं, उसके लिए मैं नैना या खुद को कभी माफ नहीं कर पाया हूं।

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