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बेटी गोद लेना चाहते थे मानव गोहिल, बताया कैसा होता है आज की दुनिया में बेटियों का बाप होना

टीवी एक्टर मानव गोहिल जल्द ही श्वेता तिवारी के साथ एक नए शो में नजर आने वाले हैं। इस शो में वह तीन बेटियों के पिता के किरदार में नजर आएंगे। मानव ने बताया है कि कैसे उन्हें टीवी पर वापसी में परेशानी हुई और कैसा है उनका, उनकी पत्नी श्वेता क्वात्रा और बेटी जारा का रिश्ता।

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'कहानी घर घर की', 'कुसुम', 'कसौटी जिंदगी की', 'अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो' जैसे कई सुपर हिट धारावाहिकों में काम कर चुके लोकप्रिय अभिनेता मानव गोहिल छोटे पर्दे पर टीवी की मशहूर एक्ट्रेस श्वेता तिवारी के संग कमबैक करने जा रहे हैं धारावाहिक 'मैं हूं अपराजिता' से। इस मुलाकात में मानव अपने सीरियल, टीवी के रिग्रेसिव होने के मुद्दे, अपनी पत्नी श्वेता क्वात्रा, कामयाब शादी के मूलमंत्र, पिता होने के अहसास और श्वेता तिवारी के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा कर रहे हैं।

आप छोटे परदे पर ये शो करने को क्यों प्रेरित हुए?
सच कहूं, तो जब मैंने पहली बार इस शो के कॉन्सेप्ट के बारे में सुना, तो मुझे कुछ खास नहीं लगा। जब मुझे डिटेल नरेशन दिया गया, तब मुझे अहसास हुआ कि मैंने अब तक जो भी पॉजिटिव या निगेटिव किरदार किए हैं उनकी तुलना में ये ग्रे चरित्र है, चैनल भी टीवी पर एक स्टीरियो टाइप को तोड़ने की कोशिश में है। शो के बारे में पूरी जानकारी मिलने पर मुझे बहुत ज्यादा अच्छा और इंट्रेस्टिंग लगा। महसूस हुआ कि यह टीम इस बार कुछ नया और हर बार के होने वाले पैटर्न से हटकर कुछ अलग कर रही हैं, जो की अपने आप में एक बड़ी बात हैं। मैं इस सीरियल में तीन बेटियों के पिता की भूमिका कर रहा हूं। असल जिंदगी में मैं बेटी का पिता हूं, तो मुझे लगा कि ये भूमिका करने में मुझे मजा आएगा। हालंकि शो का यह बाप असल जिंदगी के बाप से बिलकुल अलग है।

आप कह रहे हैं कि इस शो के जरिए छोटे परदे पर एक स्टीरियो टाइप पैटन को तोड़ने की कोशिश है, मगर आप मानते हैं कि टीवी पर हमेशा से रिग्रेसिव होने के आरोप लगते हैं?
टीवी अपने आप में समाज का प्रतिबिंब है। मेरे कई शोज ऐसे भी रहे, जिन्होंने प्रयास किया अलग और प्रगतिवादी विचारधारा को दर्शाने का, मगर उन शोज को उतनी सफलता नहीं मिली, जितनी सांचे में ढले किरदारों वाले शोज को मिली है। हालांकि मेकर हो या कलाकार वो हर बार यही चाहता है कि कुछ अलग किया जाए, मगर फिर दर्शकों की पसंद भी देखनी पड़ती है। यह जो शो इस बार हम कर रहे है इसमें भी औरत विक्टिम है, मगर इसे पीड़ित की तरह नहीं दिखाया गया है। औरत को एक अबला या पीड़िता की तरह न प्रदर्शित कर ठीक उल्टा एक मजबूत इरादे वाली महिला के रूप में प्रस्तुत किया गया हैं, जो हम अधिकतर समाज में देखते आ रहे हैं। उसका गुरूर, उसका अभिमान उसकी बेटियां हैं। यह अपने आप में बदलाव है। टीवी पर भी एक अरसे से उन औरतों को दर्शाया जा रहा है, जो आम हिंदुस्तान की औरतें हैं, ये वो वह औरत नहीं जो पार्टियों में जा कर खुद को सामाजिक बताती हैं । इस बार हम जो देखने वाले हैं वो अभी तक के धारावाहिकों पैटर्न से बिलकुल हट कर है।

श्वेता तिवारी के साथ आप तकरीबन 20 सालों बाद एक साथ आ रहे हैं। किसा रहा अनुभव? कितने इवॉल्व हुए हैं आप लोग?
ऐसा नहीं था कि श्वेता के साथ पूरी तरह से संपर्क टूटा हुआ था। बीच -बीच में किसी डांस शो या किसी रिएलिटी शो में मुलाकात होती रही थी। कई बार कुछ रीयूनियन होता है, तो हम लोग मिलते रहते हैं। मेसेज पर भी हम लोग एक-दूसरे के टच में रहे हैं। एक-दूसरे की सफलताओं पर हम बधाइयों का आदान -प्रदान भी करते हैं। बहुत अच्छा लग रहा है श्वेता के साथ काम करके। असल में मैंने सोचा नहीं था कि हम दोनों एक साथ पेयर्ड होंगे। मेरी वाइफ (उनकी अभिनेत्री पत्नी श्वेता क्वात्रा) को भी हमारी जोड़ी दिलचस्प लगी है। श्वेता तिवारी एक बेहद ही सशक्त अदाकारा हैं। उनके अभिनय की धार बेहद पैनी है, तो उनके साथ सीन करने में काफी मजा आया।

आपने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि माय डॉटर इज माय प्राइड (मेरी बेटी मेरा गर्व है) आप खुद को कैसा पिता मानते हैं?
मैं बहुत ही प्रैक्टिकल और लविंग पिता हूं। मुझे बच्चे पहले से पसंद हैं। जारा का पिता बनने के बहुत पहले से मैं एक बेटी अडॉप्ट करना चाहता था, मगर वो कभी हो नहीं पाया। मगर इतना जरूर कहूंगा कि मैं सालों से जारा का इंतजार कर रहा था और कह सकता हूं कि उसके आने के बाद सब कुछ बदल गया। मैं अपने अंदर जो चीजें पाता हूं या नहीं पाता वो सभी जारा के कारण है। मैं अपनी तमाम कमियों पर विजय हासिल करके जारा की बेहतर परवरिश करने का प्रयास कर रहा हूं। मेरे लिए जरूरी है कि वो अच्छी और मजबूत इंसान बने।

आज के दौर में हम देख रहे हैं कि लोग या तो शादी से भाग रहे हैं या फिर लंबी और मजबूत शादियां टूट रही हैं, मगर आपकी शादी को पूरे 18 साल हो गए, क्या है मूलमंत्र?
मेरा मानना है कि कोई भी शादी या रिलेशनशिप परफेक्ट नहीं होती। इतना जरूर कहूंगा कि जहां मेरी सीमा रेखा का अंत हो जाता है, शायद मैं हार मन लूं, मगर अपनी बेटी और बेहतर जिंदगी के लिए मैं और श्वेता दोनों ही सकारात्मक रहते हैं। हम शादी में एक टीम की तरह रहते हैं। हम दोनों ही एक नाव की सवारी कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि अनबन नहीं होती या हमारे बीच असहमति नहीं होती, मगर अंत में हम एक ही पेज प्रयास करते हैं।

आप जैसे जाने-माने टीवी कलाकारों के लिए एक दौर ऐसा भी था, जब मनचाहा काम नहीं मिल रहा था और आप लोग लाइम लाइट से दूर थे, तो वो दौर कैसा था आपके लिए?
इस सवाल के जवाब में मैं एक बात और जोड़ना चाहता हूं कि बहुत खतरनाक होता है, जब कलाकार को लगता है कि वो अजेय है, उसका कोई रिप्लेसमेंट नहीं है। उस सोच से सावधान रहना बहुत जरूरी है। अगर मैं अपनी बात करूं, तो मैं अपनी ग्रोथ के लिए टीवी छोड़कर बाहर गया था। मैंने एक बहुत बड़ी फिल्म भी की थी, मगर फिर वो फिल्म अधर में लटक गई और जब मैंने टीवी पर लौटने का प्रयास किया, तो मुझे महसूस हुआ कि अब मेरी जरूरत नहीं रह गई। कई नए लोगों को कम पैसों में कास्ट किया जाने लगा। असल में तब उन्हें कलाकार की जरूरत नहीं रह गई थी। वो चार-पांच साल मेरा बुरा पैच था। मेरे पास काम नहीं था। उस दौर में मैंने और श्वेता ने एक-दूसरे का साथ दिया। हम बुद्धिज्म प्रैक्टिस करते हैं और उसके सहारे हम गरिमापूर्ण ढंग से उस दौर को निभा ले गए। वरना वह मुश्किल दौर हमारे रिश्तों पर ग्रहण लगा सकता था। मुझे लगता है, जहां हमारी क्षमता समाप्त होती है, वहां हमारी आस्था शुरू होती है। बुद्धिज्म ने हमें बहुत कुछ सिखाया।

क्या आप ओटीटी सेट अप में काम करने की इच्छुक हैं? हम आपको आपकी अभिनेत्री पत्नी श्वेता क्वात्रा के साथ कब देख पाएंगे?
जहां तक ओटीटी की बात है, तो दमदार रोल मिले तो मैं जरूर करना चाहूंगा, मगर मैं ओटीटी के सेटअप में किसी बड़े कलाकार की छाया में दबकर रहना पसंद नहीं करूंगा। गुजराती फिल्मों और टीवी पर मेरे लिए रोल लिखे जा रहे हैं और मैं उनसे खुश हूं। जहां तक मेरे और श्वेता के साथ आने की बात है, तो श्वेता को टीवी नहीं करना। वे फिल्में कर रही हैं। मगर जब हमें किसी अच्छी शॉर्ट फिल्म की स्क्रिप्ट पसंद आती है और हमें लगता है, दो-तीन दिन का काम है, तो हम लोग साथ कर लेते हैं।

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