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Success Story :पति के कारण कर सकीं अपना सपना पूरा, किसान की बेटी बनीं जज

Manjula Bhalotia Success Story: मंजिला कहती हैं कि उन्हें गर्व है कि उन्हें एक किसान की बेटी होने पर गर्व है. उन्होंने खेती के कामों में भी हाथ बटाया है और अब वह अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश के पद पर चयनित हुई हैं. उनका कहना है कि कोई भी व्यक्ति ईमानदार और कठिन परिश्रम के दम पर कुछ भी पा सकता है. जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी...
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Manjula Bhalotia Success Story: ऐसा माना जाता है कि शादी के बाद लड़कियां अपनी घर गृहस्थी में पूरी तरह रम जाती हैं और वह अपने अस्तित्व को दरकिनार कर अपने परिवार के प्रति समर्पित हो जाती हैं, लेकिन इस बात को गलत साबित किया है जयपुर की मंजुला भालोटिया ने. मंजुला ने उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा परीक्षा में पहला नंबर हासिल किया है. आपको बता दें की प्रथम स्थान प्राप्त कर जज बनने वाली मंजुला दो बच्चों की मां हैं. मंजुला की कहानी देश की तमाम ऐसी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो शादी के बाद और मां बनने के बाद भी कुछ करने की और अपनी मंजिल को पाने की चाहत रखती हैं. 

पति के कारण कर सकीं अपना सपना पूरा

हालांकि, उनकी इस सफलता का श्रेय सिर्फ मंजुला को ही नहीं जाता. वह कहावत है ना कि हर एक सफल पुरुष के पीछे महिला का हाथ होता है, लेकिन मंजुला भालोटिया के मामले में यह कहावत बिल्कुल उलट नजर आती है, क्योंकि मंजिला को उनके लक्ष्य को हासिल करने में उनके पति ने उनका बखूबी साथ निभाया. मंजुला अपनी पढ़ाई पूरी कर सके और अपनी मंजिल हासिल कर सके इसलिए उनके पति ने अपनी अच्छी खासी बैंक की नौकरी दांव पर लगा दी और जुट गए बच्चों की देखभाल करने में. सही मायने में मंजिला के पति सुमित ने जीवनसाथी होने का फर्ज निभाया है. आज सुमित और मंजुला के किस्से हर तरफ छाए हुए हैं. 

जयपुर की रहने वाली हैं मंजुला

बता दें कि मंजुला भालोटिया ने उत्तर प्रदेश की हायर ज्यूडिशियल सर्विस एक्जाम में टॉप किया है. यूं तो मंजुला राजस्थान के जयपुर की रहने वाली हैं, उनकी शादी हरियाणा के रोहतक में हुई है और उन्होंने यूपी में अपना नाम चमकाया है. ऐसे में राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तीनों ही राज्यों में उनकी इस सफलता से बेहद खुशी का माहौल है. 

ऐसी है मंजुला के इस सफर की कहानी 

बता दें कि मंजुला भालोटिया जयपुर राजस्थान की रहने वाली हैं. साल 2003 में उन्होंने साफिया कॉलेज अजमेर से इकोनॉमिक्स ऑनर्स से किया. उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह वह लंदन चली गईं. लंदन में उन्होंने साल 2005 में लीड बिजनेस स्कूल से एमबीए की डिग्री हासिल की. इसके बाद साल 2009 में उनकी मुलाकात सुमित अहलावत से हुई और यह मुलाकात दोस्ती में बदल गई, जिसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला लिया.

शादी के बाद मंजुला ने राजस्थान से एलएलबी की डिग्री हासिल की. यूके से एमबीए की डिग्री लेने के बाद मंजुला ने 2 साल तक बार्कलेज बैंक में नौकरी भी की. बता दें कि एलएलबी करने के बाद मंजुला ने भगत सिंह फूल सिंह यूनिवर्सिटी खानपुर सोनीपत से एलएलएम की डिग्री हासिल की. 

सुमित ने ऐसे निभाया जीवनसाथी होने का फर्ज 

एलए एम करने के बाद मंजुला ने अपने पति के सामने अपने जज बनने की ख्वाहिश रखीं. उन्होंने कहा कि उनकी पढ़ाई काम नहीं आ रही है, जिसके बाद पति ने उनका पूरा साथ दिया. पत्नी की ख्वाहिश को उन्होंने अपनी ख्वाहिश बना लिया. इसके बाद मंजुला ने उत्तर प्रदेश ज्यूडिशियल सर्विस के बारे में जानकारी एकत्र की और कठिन परिश्रम में जुट गईं. पढ़ाई के साथ साथ दो बच्चों को संभालना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था, जिसके बाद उनके पति ने मंजुला के सपने की खातिर अपनी बैंक की नौकरी से त्यागपत्र दिया और बच्चों और परिवार को संभालने की जिम्मेदारी ले ली.

साथ ही सुमित ने मंजुला को काफी प्रोत्साहित किया. साल 2016 में मंजुला ने लॉ की परीक्षाओं में हिस्सा लेने का फैसला किया और 2020 में उन्होंने यूपी ज्यूडिशियल सर्विस की परीक्षा में हिस्सा लिया. अगस्त 2022 में इस परीक्षा के इंटरव्यू हुए और मंजिला ने पहला स्थान हासिल किया.

पढ़ाई में कभी भी व्यवधान नहीं आने दिया

मंजुला के ससुर डॉ शमशेर अलाहाबाद बताते हैं कि वह पढ़ाई में काफी अच्छी हैं. शादी के बाद भी मंजुला ने पढ़ाई करना नहीं छोड़ा. पोती मनुश्री और पोते रूद्रवीर की देखभाल के साथ पूरे परिवार को भी संभाला. वहीं, पढ़ाई में कभी भी व्यवधान नहीं आने दिया और अपनी पढ़ाई जारी रखी. साल 2017 में वह एडीए के पद पर चयनित हो गईं. 

किसान की बेटी बनीं जज

वही, मंजिला कहती हैं कि उन्हें गर्व है कि वह एक किसान की बेटी हैं. उन्होंने खेती के कामों में हाथ बढ़ाया है और अब वह अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश के पद पर चयनित हुई हैं. उनका कहना है कि कोई भी व्यक्ति ईमानदार और कठिन परिश्रम के दम पर कुछ भी पा सकता है. मंजुला बताती है कि उनके ससुर और पति सुमित ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया. वह कहती हैं कि आज इस मुकाम तक पहुंच गई हूं कि न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठकर दूध का दूध और पानी का पानी करूंगी. 

मंजुला ने पाया पहला स्थान

आपको बता दें कि 12 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी उच्च न्यायिक सेवा परिणाम का ऐलान किया था. इसमें 31 कैंडिडेट की लिस्ट में मंजुला का नाम टॉप पर है. इस लिस्ट में 23 पुरुष और 8 महिलाओं का सेलेक्शन हुआ है.

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